छत्तीसगढ़ साड़ी वितरण विवाद, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने उठाए गुणवत्ता पर सवाल

Fri 10-Apr-2026,01:20 PM IST +05:30

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छत्तीसगढ़ साड़ी वितरण विवाद, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने उठाए गुणवत्ता पर सवाल Chhattisgarh-Anganwadi-Saree-Distribution-Controversy
  • छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिली साड़ियों की गुणवत्ता और आकार को लेकर कई जिलों से शिकायतें सामने आई हैं।

  • महिला एवं बाल विकास मंत्री ने जांच के आदेश दिए, खराब साड़ियों को बदलने और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।

Chhattisgarh / Raipur :

Raipur/ छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को वितरित की गई साड़ियों को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा की गई इस वितरण प्रक्रिया पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों से कार्यकर्ताओं ने साड़ियों की गुणवत्ता और माप को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं।

शिकायतों के अनुसार, कई स्थानों पर वितरित साड़ियां निर्धारित मानकों से छोटी हैं और उनका कपड़ा भी कमजोर गुणवत्ता का है। कुछ कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि साड़ियों का रंग धोने के बाद निकल रहा है, जिससे उनका उपयोग करना मुश्किल हो गया है। इन समस्याओं के चलते आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं में नाराजगी बढ़ रही है।

इन आरोपों के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने माना कि कुछ स्थानों से गुणवत्ता को लेकर शिकायतें आई हैं, लेकिन सभी साड़ियों को खराब बताना उचित नहीं है। मंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने स्वयं साड़ी का परीक्षण किया और उसमें कोई बड़ी खामी नहीं पाई।

हालांकि, मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि जहां-जहां शिकायतें मिली हैं, वहां तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित अधिकारियों को खराब साड़ियों को बदलकर नई साड़ियां देने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही पूरे मामले की जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।

इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रूप भी ले लिया है। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार के समय भी साड़ी वितरण में बड़े स्तर पर अनियमितताएं होती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय दी जाने वाली साड़ियों की गुणवत्ता बेहद खराब होती थी।

वहीं विपक्ष ने इस मामले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि यह मामला भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

इस विवाद ने प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है और दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। अब यह देखना होगा कि जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है और क्या कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर हो पाती है।